कहानी राजस्थान की रेत से उठकर गुजरात में होटल साम्राज्य खड़ा करने वाले संघर्ष और संकल्प के प्रतीक कालूराम प्रजापत की

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बालोतरा से अरविंद थोरी की रिपोर्ट –

एक सामान्य किसान पुत्र से होटल व्यवसाय के उभरते सितारे तक

पश्चिम राजस्थान का जिला बाड़मेर जहां गर्म हवाएँ चलती हैं, जहां बारिश न आने के डर में किसान का दिल रोज़ धड़कता है, वहीं की मिट्टी में जन्मे एक साधारण युवक ने अपनी मेहनत से ऐसा मुकाम बनाया कि आज उनका नाम गुजरात के होटल व्यवसाय में प्रतिष्ठा, गुणवत्ता और विश्वास का प्रतीक बन चुका है।

Business Success Story : अपने बेटे नेमा भाई के साथ मंदिर दर्शन करते हुए ।



कालूराम उर्फ़ कालूभाई प्रजापत

जिन्होंने 2005 में मात्र संघर्ष, साहस और उम्मीद के सहारे राजस्थान से निकलकर गुजरात के चिखली में कदम रखा और आज चार सफल होटल शाखाओं के मालिक हैं, जो प्रतिवर्ष 15-20 लाख रुपये से अधिक का मुनाफा देती हैं।

परिचय:-

जन्मस्थान: डांगेवा, ग्राम लुणाकला, पायला कला (जिला- बाड़मेर, राजस्थान)

पिता: श्री लालाराम प्रजापत (किसान)

परिवार: युवा बेटा नेमाराम (B.A), बेटी रेखा (12वीं)

यह परिवार पुश्तैनी खेती पर निर्भर था,वही खेती जो बारिश पर टिकी होती है। यही अनिश्चितता कालूराम के भीतर एक सवाल लेकर उगी …उस दौर में कालूराम प्रजापत कहते हैं कि –  ‘क्या मैं अपने परिवार को ऐसी जिंदगी देना चाहता हूँ जो मौसम पर निर्भर हो?’

यह प्रश्न ही आगे चलकर उनका उद्यमी बनने का सबसे बड़ा कारण बना और आज आपके सामने उदाहरण के रूप में है…

Business Success Story: अपनों संग हथाई करते हुए कालूराम प्रजापत



संघर्ष की शुरुआत-
साल 2005 में कालूराम अपने गांव से गुजरात के चिखली आए।
न कोई बड़ा बजट, न कोई अनुभव सिर्फ़ मेहनत और खुद पर अटूट विश्वास। उन्होंने एक छोटी-सी जगह किराए पर लेकर शुरू किया – “पवन आई माता होटल – चिखली”

शुरुआत में कालूराम स्वयं – कड़ी, सब्जी बनाते,रोटियाँ सेंकते,काउंटर संभालते और ग्राहकों की सेवा करते।
शुरुआत में “कड़ी-सोगरा” और “दाल-बाटी” जो मूल रूप से राजस्थानी स्वाद है और ड्राइवरों व यात्रियों में जल्दी लोकप्रिय हो गया।

शुरुआती कठिनाइयाँ –
जहां कई गिरते हैं, वहां उन्होंने लड़ाई लड़ी। होटल व्यापार कभी रातों-रात सफल नहीं होता। कालूराम के सामने भी चुनौतियों का पहाड़ था। कभी ग्राहकों की संख्या कम तो कभी किराया देने में कठिनाई, कभी स्थानीय प्रतिस्पर्धा,कभी स्टाफ की कमी और कभी घाटे में जाने का डर…लेकिन उन्होंने एक भी दिन हार नहीं मानी। जो भी कमाया, वापस व्यापार में लगाया।

गुणवत्ता जिसने पहचान दिलाई –

राजस्थानी स्वाद में भोजन की गुणवत्ता, साफ-सफाई, ड्राइवर भाईयों से परिवार जैसा व्यवहार और खाने के किफायती दरें ने कुछ ही समय में उनकी मेहनत ने असर दिखाना शुरू किया।

धीरे-धीरे उन्होंने न सिर्फ़ राजस्थानी ड्राइवरों, ग्राहकों बल्कि ट्रांसपोर्ट, ट्रैवलर्स, ड्राइवरों तक अपनी पहचान बनाई।

सफलता की यात्रा-
“एक होटल से चार शाखाओं तक का सफर”
लगातार बढ़ती मांग के कारण आज कालूराम प्रजापत की गुजरात में क्रमशः चार सफल शाखाएं हैं- पवन आई माता – चिखली, कृष्णा आई माता – वरणाम, पवन आई माता गोल्डन – सोकड़ी बड़ोदा, कृष्णा कठियावाड़ी – बड़ोदा
इन सभी शाखाओं में देसी राजस्थानी खाना, शानदार क्वालिटी और किफायती दरें व्यवसाय की पहचान बन चुकी हैं।

मेहनत का फल-
एक समय जेब में सिर्फ़ सपने थे। आज कालूराम स्वयं 60-70 परिवारों को रोजगार देने का सराहनीय कार्य कर रहे हैं। मैं परिवारों को का जिक्र इसलिए करता हूं कि प्रत्येक होटल कर्मचारीयों को एक रोजगार के साथ, मान सम्मान और इज्ज़त की रोजी-रोटी मिलता है।

कालुराम जी बताते है कि – अगले महीने की पहली तारीख को एक नई शाखा का उद्घाटन हैं, यह केवल मेरे व्यवसाय में वृद्धि नहीं बल्कि 16-18 परिवारों को नया रोजगार मिलेगा। यह सफलता सिर्फ़ मेरे होटल व्यवसाय की नहीं,यह हम सब होटल कर्मचारीयों के संघर्ष की जीत है। उन कर्मचारियों के घर परिवार और उनके माता-पिताओं की दुआएं हैं, जिसकी वजह से हम व्यवसाय में वृद्धि कर पा रहे हैं।

सामाजिक जीवन –
कालूराम प्रजापत केवल व्यावसायिक नहीं, व्यावसायिक से बढ़कर समाजसेवी भी है। वे हमेशा समाज के कामों में आगे रहते हैं:- चाहे गरीबों और जरूरतमंदों की मदद हो या गांव और समाज के विकास कार्य हो या फिर सामाजिक कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी। वह राजस्थान से दूर रहकर भी अपनी मिट्टी से जुड़े हुए हैं। शायद यही कारण है कि समाज उन्हें सम्मान की दृष्टि से देखता है।

अपने निज स्थान: व्यवसाई कालूराम प्रजापत



राजनीतिक यात्रा –
साल 2019 में कालूराम प्रजापत ने आम पंचायती राज चुनाव में गांव के विकास के उद्देश्य से लूणाकला ग्राम पंचायत से सरपंच चुनाव लड़ा। यहां तीन प्रत्याशियों के बीच भारी मुकाबला हुआ,कालूराम प्रजापत महज़ 12 वोटों से चुनाव हार गए। लेकिन यह हार भी उनके हौसलों को नहीं तोड़ सकी। आज वे आगामी पंचायती राज चुनाव की तैयारी में जुटे हुए हैं।
राजनीति को लेकर कालूराम प्रजापत बताते हैं कि मेरे लिए राजनीति सत्ता नहीं, सेवा का माध्यम है। मैं गांव को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाना चाहता हूं। लोग भी चाहते हैं कि मैं उनकी सेवा करूं। पिछले चुनाव में हम महज़ 12 वोटों से चुनाव हार गए, लोग वर्तमान के सरपंच से परेशान हैं, उन्होंने जो भ्रष्टाचार किया है, जनता को हिसाब देना होगा। इस बार लोग तैयारियां में जुटे हुए हैं, लोगों की जीत में ही हमारी जीत निहित हैं।”

File photo: कालूराम प्रजापत: 2019 पंचायती राज चुनाव में भाग्य आजमाया



कालूराम प्रजापत की जर्नी से आज के नौजवान युवाओं सिखना चाहिए। आपकी जन्म परिस्थितियाँ आपकी नियति तय नहीं करतीं। आपकी मेहनत और धैर्य के साथ किया संघर्ष किसी भी सपने को साकार कर सकती है। जो व्यक्ति हार नहीं मानता, वही जीतकर दिखाता है।
बाड़मेर की रेतीली धरती से उठकर गुजरात की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में अपनी अलग पहचान बनाना, यह सिर्फ सफलता नहीं, प्रेरणा है और हर नौजवान युवाओं को मोटिवेट करती है, जो संघर्ष से घबरा जाते हैं या हार मान जाते हैं।

Business Success Story : अपने बेटे नेमा भाई के साथ कालूराम जी प्रजापत मंदिर दर्शन करते हुए ।

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