बालोतरा से अरविंद थोरी की रिपोर्ट –
पिस्ता देवी—आवास से अधिकार तक, अब आत्मनिर्भरता की मिसाल
बालोतरा। राजस्थान सरकार द्वारा चलाए जा रहे ‘ग्रामीण सेवा शिविर’ की सार्थकता को साबित करते हुए, ग्राम पंचायत टापरा, पंचायत समिति बालोतरा की निवासी पिस्ता देवी पुत्री भगवान चंद आज पूरे क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की एक जीती-जागती मिसाल बनकर उभरी हैं।
पिस्ता देवी का जीवन पहले घोर संघर्ष और असुरक्षा से भरा था। उनके पास न तो सिर छिपाने के लिए पक्का मकान था और न ही उस जमीन का कोई कानूनी दस्तावेज़, जिस पर वह रहती थीं। गरीबी और तंगहाली के बीच उनका परिवार एक अस्थिर जीवन जीने को मजबूर था।
लेकिन मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में शुरू किए गए ग्रामीण सेवा अभियान ने उनकी आवाज़ को प्रशासन तक पहुँचाया और उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया। सरकारी योजनाओं के समन्वय ने पिस्ता देवी के लिए एक नई सुबह लाई। उन्हें केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत पक्का आवास स्वीकृत हुआ। इस घर ने उनके परिवार को न केवल सुरक्षा दी, बल्कि एक सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार भी प्रदान किया। आवास के साथ ही स्वच्छ भारत मिशन के तहत उनके घर में शौचालय का निर्माण कराया गया, जिसने उनके जीवन में सुविधा और गरिमा दोनों को सुनिश्चित किया। उन्हें उनके आवासीय भूखंड का पट्टा (कानूनी दस्तावेज़) भी प्रदान किया गया। अब पिस्ता देवी के पास अपने घर और जमीन का अटल कानूनी अधिकार है।
अपने नए और सुरक्षित जीवन से भावुक पिस्ता देवी ने कहा, “पहले न घर था, न कागज़। अब सरकार ने घर, शौचालय और पट्टा सब कुछ दिया। यह मेरे जीवन की सबसे बड़ी खुशी है।”
पिस्ता देवी — संघर्ष से आत्मनिर्भरता तक, ग्रामीण सेवा शिविर बनी बदलाव की मिसाल
