सिणधरी से अरविंद थोरी की रिपोर्ट:-
दो हादसों के बाद भी नहीं बदली व्यवस्था, 8-9 लाख का जनसहयोग भी बेअसर रहा
क्या 25 हजार की आबादी वाला यह कस्बा आज भी “भगवान भरोसे” है?
बालोतरा का नामी वाणिज्यिक कस्बा… पर सुरक्षा “शून्य“
बालोतरा। सिणधरी 25 हजार की आबादी वाला, मंडी, कॉम्प्लेक्स, गैस एजेंसियां, कॉलेजें, स्कूलें, अस्पताल, होटलें, पैट्रोल पंप, वनविभाग और 1000 से अधिक दुकानों वाला एक बड़ा वाणिज्यिक कस्बा। लेकिन विडंबना यह है कि इस कस्बे को सरकार की ओर से आज भी आगजनी जैसी आपदाओं से निपटने के लिए एक भी दमकल वाहन नहीं मिला है।
बालोतरा जिला मुख्यालय से 50 किमी और बाड़मेर से 68 किमी दूर बसे सिणधरी में आग लगने पर पहली मदद दो घंटे बाद ही मिलती है। यह देरी कई बार जिंदगियों और करोड़ों की संपत्ति पर भारी पड़ चुकी है।
पहला भीषण हादसा: 30 मई 2023 की रात टैंकर घुसा,आग भड़की, दो जिंदा जले
30 मई 2023 को सिणधरी मेगा हाईवे पर सांचौर चौराहे पर देर रात 10:30 बजे भंवरू भांभू की चाय होटल में बैठे भंवरू के लिए सब कुछ एक पल में बदल गया। गुड़ामालानी से आ रहा केमिकल टैंकर टायर फटने से अनियंत्रित हुआ और होटल में घुसते ही आग की लपटों में बदल गया। अंदर बैठे भंवरू सहित दो लोगों की दर्दनाक मौत हो गई।
हादसा – रात 10:30
दमकल पहुंची- 11:30 (50 किमी दूर से)
रात 12:30 आग काबू में
दो जिंदगियां और 5 दुकानें जलकर खाक…
ललिता टी स्टॉल, सुभाष मेडिकल, मरुधर ट्रेवल्स, न्यू बाबा रामदेव टी स्टॉल, वीर तेजाजी होटल लाखों की संपत्ति और 2 जिंदगियां जलकर राख, चंद मिनटों में सब कुछ खत्म।
कलेक्टर, एसपी, एडीएम, तहसीलदार all on site लेकिन दमकल की कमी के कारण आग पर काबू करने का कोई आधुनिक साधन नहीं था… अगर सिणधरी में दमकल होती, तो आग 15-20 मिनट में नियंत्रित की जा सकती थी और दो जानें बच जातीं।
दूसरा भीषण हादसा: 17 अक्टूबर 2025 को SUV-ट्रेलर भिड़ंत, 4 युवक जिंदा जल गए।
जैसलमेर की दु:खांतिका में 2 दर्जन मौतें होने के सिर्फ 30 घंटे बाद बालोतरा जिले के सिणधरी क्षेत्र में सड़ा के पास फिर वही त्रासदी दोहराई गई। रात 1 बजे अनियंत्रित SUV ट्रेलर से टकराई। जोरदार धमाका हुआ,गाड़ी 2 मिनट में आग का गोला बन गई। 5 लोग सवार 4 युवक जिंदा जल गए…चालक को स्थानीय लोगों ने फाटके तोड़फोड़ कर निकाला।
2 घंटे तक कोई दमकल नहीं पहुंची। बालोतरा से दमकल पहुंची तब तक सब कुछ जलकर राख हो गया। शवों की पहचान के लिए DNA टेस्ट करवाने पड़े। सड़कें टूटी, रोशनी कम और उस पर दमकल की अनुपस्थिति ऐसी त्रासदी किसी भी वक्त दोहराई जा सकती है।

भावुक लोगों ने खुद पैसे जोड़े…लेकिन सरकार ने मुंह मोड़ा
2023 की घटना के बाद सिणधरी के क्षेत्रवासियों ने भावुक होकर करीब 8-9 लाख रुपए इकट्ठे किए…लेकिन दमकल गाड़ी खरीदना ही काफी नहीं…इसमें वाहन मूल्य, ड्राइवर का वेतन, गाड़ी का ईंधन,नियमित मेंटेनेंस, सम्बंधित उपकरण और पानी टैंकर की व्यवस्था यह सब निजी व्यवस्था से संभव नहीं था।
सरकार से मांग उठी, लेकिन…नेताओं ने इस मुद्दे की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। आम विधानसभा चुनाव में यह मुद्दा फिर उठा, हमने भी हमारा पत्रकारिता धर्म निभाते हुए जो भी नेता सिणधरी आये, फायर ब्रिगेड को प्राथमिकता देखकर उनसे सवाल किया लेकिन मिला केवल आश्वासन।
सवाल जो सिणधरी आज पूछ रहा है?
क्या 25 हजार की आबादी वाला कस्बा दमकल जैसी मूलभूत नागरिक सुविधा का हकदार नहीं?
जब यहां मंडी में रोज करोड़ों का व्यापार होता है…1000 से अधिक दुकानें हैं, दो बड़ी कॉलेजे, आसपास कई बड़े विद्यालय, अस्पताल, गैस एजेंसियां, कॉम्प्लेक्स, होटलें, पैट्रोल पंप और आस पास बड़े देवस्थान इत्यादि तो अग्निशमन सेवा क्यों नहीं?
क्या जान का मूल्य शहरों में अधिक और कस्बों में कम होता है?
सिणधरी बालोतरा और बाड़मेर जिला मुख्यालय दोनों से क्रमशः 50-70 किलोमीटर दूर स्थित है…इस दूरी में दमकल नहीं होने की वजह से करोड़ों की संपत्ति और कई इंसानी जानें जल जाती हैं।
हर बार हादसे के बाद नेता संवेदना प्रकट करते हुए सोशल मिडिया पर पोस्ट करते हैं और कुछ दिनों बाद उस मुद्दे को भुल जाते हैं लेकिन वो कैसे भुला पाएंगे जिन्होंने ऐसे हादसों में अपनों को खोया हैं…
क्या हर त्रासदी के बाद जनता ही पैसे जोड़े?
सिणधरी क्षेत्र की जनता व्यवस्था एवं सुरक्षा के नाम पर सरकारों को करोड़ों रूपए का टैक्स भर्ती है उनका क्या?
सरकार का कर्तव्य क्या सिर्फ हादसों के बाद दुख प्रकट करना है? यहां के जनप्रतिनिधि चुनाव के समय जब आते हैं तो इस वादे को प्राथमिकता देकर वोट मांगते हैं,सिणधरी सिवाना विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है और तीन विधानसभाओं से घिरा हुआ है। सिवाना विधायक हमीर सिंह भायल को क्षेत्रवासियों ने भी कई बार अवगत करवाया…लोगों ने ज्ञापन दिए… सिणधरी अब नगर पालिका बन गया है। लेकिन दमकल अभी भी नहीं…
क़ानूनी और नागरिक अधिकार क्या कहते हैं?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के अनुसार –
जीवन और व्यक्तिगत सुरक्षा का अधिकार राज्य की जिम्मेदारी है। बड़ी आबादी वाले क्षेत्र में दमकल न होना सीधे जीवन सुरक्षा के अधिकार का उल्लंघन है।
आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 22, 24, 30 के अनुसार –
जिला व राज्य प्रशासन पर यह जिम्मेदारी है कि:
1.खतरा-प्रवण क्षेत्रों में अग्रिम तैयारी रखें।
2.आवश्यक संसाधन उपलब्ध करवाएं।
3.जीवन व संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करें।
राजस्थान नगरपालिका/पंचायत अधिनियम के तहत-
अग्निशमन सेवा नगर निकायों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
सिणधरी एक बड़ा व्यापारिक कस्बा है लेकिन अभी तक नगरपालिका द्वारा दमकल उपलब्ध नहीं करवाई गई।
आखिर कब जागेगी व्यवस्था?
सिणधरी में पिछले कई वर्षों में: ऐसे हादसों में 6 लोगों की जिंदगियां चली गई…करोड़ों की संपत्ति का नुकसान… हर हादसे के 2 घंटे बाद दमकल पहुंच पाती है। बार-बार मांग, पर कोई कार्रवाई नहीं…हाल ही में सिणधरी वन विभाग क्षेत्र में लगी आग को बुझाने बालोतरा से अग्निशमन गाड़ी पहुंची तब तक हजारों पौधे जलकर राख हो गए… पक्षियों के घोंसले और छोटे छोटे पंछी आग के भेंट चढ़ गए, पर्यावरण को गहरा नुकसान हुआ… रोजमर्रा की छोटी आगजनी पर भी कोई नियंत्रण नहीं।
क्या हम तीसरी बड़ी त्रासदी का इंतजार कर रहे हैं?
क्षेत्रवासियों की मांग है कि सिणधरी को तुरंत फुल-टाइम दमकल वाहन दिया जाए जिसमें पानी टैंकर, प्रशिक्षित ड्राइवर/फायरमैन, हाईवे एरिया में तत्काल रिस्पॉन्स यूनिट और मंडी, स्कूलें, कॉलेजों के लिए फायर सेफ्टी की व्यवस्थाएं की जाए।
